शिमला:- राज्य कमेटी सदस्य सेब उत्पादक संघ संजय चौहान ने जारी एक बयान में कहा है किहिमाचल सेब उत्पादक संघ प्रदेश सरकार से मांग करता है कि किसानों का सेब व अन्य फलों का मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) का बकाया भुगतान तुरन्त किया जाए। सरकार ने सेब व अन्य फलों के भुगतान की प्रक्रिया मार्च माह में शुरू की थी तथा पहले 30 बोरी तक के किसानों को भुगतान करने का निर्णय लिया गया था और उसके बाद जिन किसानों ने 100 बोरी तक दी थी उनको भुगतान करने का निर्णय लिया गया था। परन्तु अब किसानों को उनके द्वारा जरूरी दस्तावेज जमा करवाने के बावजूद भी कई दिनों तक पैसा उनके खातों में जमा नहीं किया जा रहा है। कई किसानों को तो एक माह से अधिक समय दस्तावेज जमा करवाए हो चुके हैं परन्तु उनके खाते में अभी तक पैसा जमा नहीं किया गया है। मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 1987-88 में शुरू की गई थी जिसमें आलू, प्याज़, सेब, संतरा, अंगूर आदि नकदी फसलों को शामिल किया गया था। ये देश के विभिन्न राज्यों में लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जब मण्डियों में गिरावट के कारण किसान को उसकी फसल का बेहतर दाम नहीं मिलता था तो केंद्र सरकार की इस योजना के तहत सरकार द्वारा तय एजेंसियां किसान की फसल की खरीद करती है। हिमाचल प्रदेश में यह योजना सेब व नींबू प्रजाति के फलों के लिए उसी समय से लागू है। परन्तु वर्ष 2023 के बजट में केंद्र सरकार द्वारा इसके लिए बजट में कटौती कर दी है। जिससे राज्यों को उनका केंद्र सरकार से मिलने वाला हिस्सा बंद कर दिया गया है और अब राज्य सरकार भी धीरे धीरे इस योजना से अपने हाथ पीछे खींच रही है। संघ केंद्र सरकार से मांग करता है कि मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) को जारी रखा जाए और इसके लिए कम से कम पहले की भांति ही 1500 करोड़ रूपए का प्रावधान किया जाए तथा प्रदेश सरकार को बकाया भुगतान किया जाए। यदि केंद्र व राज्य सरकार मण्डी मध्यस्थता योजना(MIS) को बन्द करने पर विचार कर रही है तो यह सरकार का किसान विरोधी निर्णय है और इससे किसान जो पहले ही गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है उसका संकट और बढ़ेगा। सेब उत्पादक संघ सरकार के इस योजना को बन्द करने के किसी भी तरह के निर्णय का विरोध करेगा।
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